कोर सेक्टर में लगातार चौथे माह गिरावट

खनिज ईंधन, विद्युत और इस्पात जैसे क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट के कारण बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों (कोर सेक्टर) का उत्पादन नवंबर माह में 2018 की तुलना में 1.5 प्रतिशत कम रहा।

यह लगातार चौथा माह है जब बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में संकुचन आया है। 31 दिसंबर, 2019 को जारी आंकड़ों के अनुसार इन आठ में से पांच बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में बड़ी गिरावट से नवंबर में इनमें कुल मिला कर संकुचन हुआ।

आठ कोर उद्योगों के सूचकांक (आधार वर्ष: 2011-12) का सार

कोयला

नवम्‍बर, 2019 में कोयला उत्‍पादन (भारांक: 10.33%) नवम्‍बर, 2018 के मुकाबले 2.5 प्रतिशत घट गया।

कच्‍चा तेल

नवम्‍बर, 2019 के दौरान कच्‍चे तेल का उत्‍पादन (भारांक: 8.98%) नवम्‍बर, 2018 की तुलना में 6.0 प्रतिशत गिर गया।

प्राकृतिक गैस

नवम्‍बर, 2019 में प्राकृतिक गैस का उत्‍पादन (भारांक: 6.88%) नवम्‍बर, 2018 के मुकाबले 6.4 प्रतिशत गिर गया।

रिफाइनरी उत्‍पाद

पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्‍पादों का उत्‍पादन (भारांक: 28.04%) नवम्‍बर, 2019 में 3.1 प्रतिशत बढ़ गया।

उर्वरक

नवम्‍बर, 2019 के दौरान उर्वरक उत्‍पादन (भारांक: 2.63%) 13.6 प्रतिशत बढ़ गया।

इस्‍पात

नवम्‍बर, 2019 में इस्‍पात उत्‍पादन (भारांक: 17.92%) 3.7 प्रतिशत घट गया।

सीमेंट

नवम्‍बर, 2019 के दौरान सीमेंट उत्‍पादन (भारांक: 5.37%) नवम्‍बर, 2018 के मुकाबले 4.1 प्रतिशत अधिक रहा।

बिजली

 नवम्‍बर, 2019 के दौरान बिजली उत्‍पादन (भारांक: 19.85%) नवम्‍बर, 2018 के मुकाबले 5.7 प्रतिशत गिर गया।

क्या है कोर सेक्टर?

कोयला, कच्‍चा तेल, उर्वरक, इस्पात, पेट्रो रिफाइनिंग, बिजली, सीमेंट और नेचुरल गैस उद्योगों को किसी अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद माना जाता है। यही आठ क्षेत्र कोर सेक्‍टर कहे जाते हैं।

इनकी विकास दर में कमी या वृद्धि बताती है कि किसी देश की अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद की हालत क्‍या है।

सरकार प्रत्येक माह कोर सेक्टर ग्रोथ के आंकड़े जारी करती है। यह आंकड़े इन आठों सेक्टर्स में उत्पादन की तस्वीर सामने रखते हैं।

औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (IIP) में कोर सेक्टर की 40.27 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

क्यों आ रही है गिरावट?

देश में आर्थिक गतिविधियां कम हो रही हैं। आर्थिक गतिविधियों में कमी का असर इन क्षेत्रों पर पड़ता है और यह ऐसे क्षेत्र हैं जो औद्योगिक उत्पादन में इस्तेमाल किए जाते हैं। जब लोग सामान ख़रीदना कम कर देते हैं तब इसका सीधा असर क्षेत्रों पर पड़ता है।