केरल: नागरिकता संशोधन अधिनियम- 2019 (CAA) के विरोध में प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य

केरल सीएए के विरोध में प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य बन गया है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम- 2019 (CAA)  'धर्मनिरपेक्ष' नज़रिए और देश के ताने बाने के ख़िलाफ़ है और इसमें नागरिकता देने से धर्म के आधार पर भेदभाव होगा।

मुख्यमंत्री विजयन ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) को रद्द करने की मांग करते हुए राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा, "यह क़ानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।"

क्या है सीएए?

संसद के दोनों सदनों से पारित और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन अधनियम (CAA) बना है लेकिन इसके विरोध में देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन का दौर लगातार जारी है।

पूरे देश में इसका विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि इसे संविधान की मूल भावना धर्मनिरपेक्षता के ख़िलाफ़ बताया गया है।

इस अधिनियम के मुताबिक़ भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से शरण के लिए भारत आए गैर मुस्लिम हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

इन तीन देशों के मुसलमानों को यह कहते हुए इससे अलग रखा गया है कि इन तीन देशों में वे अल्पसंख्यक नहीं हैं।